
Difference Between Fundamental Analysis and Technical Analysis आसान भाषा में सीखेंगे स्टेप बाय स्टेप एक टेबल में नीचे दिया गया है इसमें पढ़िए ।
| बिंदु | Fundamental Analysis | Technical Analysis (तकनीकी विश्लेषण) |
| क्या देखा जाता है? | इसमें कंपनी का हालत देखा जाता है कि कंपनी मजबूत है की कमजोरी | इसमें कंपनी का उतार-चढ़ाव और पैटर्न को देखा जाता है |
| डेटा किसका उपयोग होता है? | finance report. Balance sheet, profit and loss, PE ratio assets and etc. | chart pattern, indicators ,volume,( RSI MCD) |
| उद्देश्य | इसमें शेयर का दाम जानने को मिलता है शेयर सस्ता मिल रहा है कि महंगा इसमें | इसमें जानने को मिलता है कि शेयर को कब खरीदे और कब बेचे |
| समय सीमा | इसमें लंबी अवधि के लिए निवेश होता है जैसे कि कुछ सालों साल होता है | इसमें छोटे अवधि के लिए निवेश होता है जैसे कि कुछ minute या कुछ ghante एक होता intraday Trading दूसरा होता है Swing Trading |
| कौन करता है? | Investor(Warren buffet) | Trader Intraday trading /Swing Trading |
| तरीका | किसी कंपनी का बैकग्राउंड चेक करना | किसी स्टॉक या शेयर का चार्ट पेटर्न का एनालिसिस |
| उदाहरण | शादी से पहले लड़का/लड़की का परिवार, नौकरी, नेचर देखना | किसी की चाल देखकर अंदाजा लगाना कि वो कहाँ जा रहा है |
| Risk Level | इसमें थोड़ा कम रिस्क होता है | इसमें थोड़ा ज्यादा रिस्क होता है |
फंडामेंटल एनालिसिस क्या है

किसी कंपनी के बारे में गहराई रिसर्च किया जाए तो उसे में फंडामेंटल एनालिसिस कहा जाता है जैसे की मैं एक एग्जांपल में दे रहा हूं
उदाहरण
मान लो कोई भी लड़का या लड़की की शादी होता है तो उसमें भी analysis किया जाता है कि लड़का कैसा है कैसा नहीं उसका बैकग्राउंड पता किया जाता है फिर उसके बाद भी लड़की का भी वैसे ही बैकग्राउंड पता किया जाता है की लड़की कैसी है कैसा नहीं की बाद में आगे जाकर दिक्कत ना हो बस इसी को तो फंडामेंटल एनालिसिस कहते हैं यह कोई भी चीज को या कोई भी रिश्तेदार या कोई भी कंपनी के बारे में अगर हम गहराई से रिसर्च करते हैं तो उसे फंडामेंटल एनालिसि कहते हैं
बस उसी तरह कोई भी कंपनी के बारे में अगर हम गहराई से एनालिसिस करते हैं तो हम उसे फंडामेंटल एनालिसिस कहते हैं जैसे की कंपनी का प्रॉफिट, रेवेन्यू, कंपनी के assetes कितना है प्रोडक्ट सर्विस कैसा है कंपनी का मैनेजमेंट कैसा है ,यह सब देखा जाता है उसके बाद हम निवेश करते हैं अगर हम बिना फंडामेंटल एनालिसिस किए निवेश किया जाए तो हमें काफी बड़े लॉस हो सकते हैं इसलिए हमें फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी है
क्या फंडामेंटल एनालिसिस महत्वपूर्ण है? क्यों?
हा फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी है क्योंकि कोई भी कंपनी में हम पैसा ऐसे नहीं लगा सकते हैं और कोई भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले हमें उसके बारे में गहराई से रिसर्च करने की आदत बनानी चाहिए। इसलिए हमें फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी है कंपनी के खर्च कितना है असेट्स कितना है रेवेन्यू कितना आ रहा है कितना डेट पढ़ा हुआ है यह सब की जानकारी के लिए हमें फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत महत्वपूर्ण है
शेयर का असली वैल्यू पता करने में मदद मिलती है
कहीं पर देखा जाता है कि शेयर इतना महंगा भी नहीं होता लेकिन उसकी प्राइस काफी महंगा रहता है और एक बात हम कोई भी शेयर को देखते हैं कि वह प्राइस में महंगा लगता है तो हम सोचते है कि बहुत ज्यादा महंगा मिल रहा है इसलिए हमें फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी है इसलिए हमें कोई भी शेयर या स्टॉक में पैसा निवेश करने से पहले हमें फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी है क्योंकि लॉस भी तो कम से कम हो जो हमें एक फंडामेंटल एनालिसिस करने में है आदत बनाती है
फंडामेंटल एनालिसिस के लाभ – Advantages of Fundamental Analysis in Hindi
अब हम फंडामेंटल एनालिसिस के लाभ के बारे में बात करेंगे फंडामेंटल एनालिसिस वह एनालिसिस है जो कोई भी कंपनी की ताकत और कमजोरी के बारे में पता कर सकते हैं की कंपनी में कितना जान है और कंपनी कितना कमजोर है यह उसके लिए लाभदायक है जो लंबे समय के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हैं उसके लिए सबसे बेस्ट फंडामेंटल एनालिसिस रहता है
लंबी अवधि के लिए बेहतर निवेश निर्णय
जब हम फंडामेंटल एनालिसिस करते हैं किसी कंपनी के बारे में तो हमें किसी कंपनी के शेयर के बारे में हमें बहुत जानने का अच्छा मौका भी मिल जाता है की कंपनी आगे जाकर कैसा परफॉर्मेंस करेगी कैसा नहीं और उसका आगे का प्रोडक्ट कैसा होगा कैसा नहीं और यह आगे जाकर क्या निर्णय लेगा उसके भी बारे में हमें अच्छे से जानकारी मिल जाते हैं और फ्यूचर में क्या प्लान है बस इसी हिसाब से हमें मुनाफा भी मिल सकते हैं भले ही उसकी कीमत आज के दौर पर कम रहेगा लेकिन उसकी कीमत आगे जाकर जरूर बढ़ेगी । इसलिए हमें फंडामेंटल एनालिसिस के निर्णय लेना बहुत जरूरी है
सोच-समझकर निवेश करने में मदद
यह तरीका कंपनी के बारे में काफी डिटेल जानकारी दे देते हैं जब जानकारी दे देते हैं तो इससे हमें काफी समय मिलता है कि कंपनी कैसा है कैसा नहीं है और इसमें कौन सा प्रोडक्ट चल रहा है बिजनेस मॉडल क्या है कंपनी का असेट्स क्या है कंपनी के रेवेन्यू कितना हो रहा है यह सब मालूम होने से हमें कोई भी स्टॉक या शेयर में पैसा लगाने में काफी ज्यादा समझदारी मिलती है
फंडामेंटल एनालिसिस की सीमाएँ – सरल भाषा में
फंडामेंटल एनालिसिस की सीमाएं आई हम समझते हैं स्टेप बाय स्टेप आप पूरा आसान भाषा में आप पढ़ते रहिए बहुत मजा आएगा
1.समय ज्यादा लगता है
फंडामेंटल एनालिसिस करने में समय ज्यादा इसलिए लगता है क्योंकि कंपनी के बारे में पूरा डिटेल हमें जानकारी चाहिए सबसे पहले कंपनी का रेवेन्यू बैलेंस शीट असेट्स कितना कर्जा डेट पड़ा हुआ है यह सब हमें भी देखना पड़ता है पूरा इसका बैलेंस शीट पढ़ना पड़ता है कितना कर्ज कहां कितना देना है
और आप पूछेंगे यह सब कहां पढ़ने को मिलेगा यह सब आपको moneycontrol के वेबसाइट में मिलेगा और भी वेबसाइट है जैसे कि यह screener, ticker tape यह सब के वेबसाइट में आपको पढ़ने को मिलेगा और जानकारी आराम से हासिल कीजिए जब भी आपको समय मिले यह सब पढ़ते रहे आपको कंपनी के बारे में काफी डिटेल मिलेगी हां अगर कंपनी या किसी इंडस्ट्री में जॉब कर रहे हैं तब आप एक-दो घंटा टाइम निकाल कर थोड़ा-थोड़ा पढ़ते रहिए काफी कुछ आपको सीखने को मिलेगा।
2.जल्दी पैसा कमाने वालों के लिए नहीं
यह उन लोगों के लिए नहीं है जो जल्दी-जल्दी पैसा कमा सके क्योंकि इसमें कुछ दिन या कुछ हफ्तों से हम पैसा नही कमा सकते है खासकर उन लोगों के लिए नहीं है क्योंकि जो ट्रेडिंग करते हैं जैसे कि ट्रेडिंग करते कुछ दिन या कुछ हफ्तों के लिए यह फंडामेंटल एनालिसिस उन लोगों के लिए नहीं है
3. बाजार की भावनाओं पर काबू नहीं
हम समझेंगे बाजार की भावनाओं के बारे में जब भी हम देखते की कंपनी तो अंदर से बहुत अच्छा रहता है लेकिन फिर भी उसका शेयर या स्टॉक गिरा हुआ इसलिए रहता है क्योंकि इंसान की भावनाएं की वजह से गिरा हुआ रहता है और आप पूछेंगे भावनाएं से कैसे गिरावट होता है जैसे की डर, लाल, झूठी ,अफवाहें कुछ भी ।, कोई उल्टा-पुल्टा न्यूज़ आ जाए इस हिसाब से मार्केट में काफी उतार चढाव होता है और अच्छा खासा कंपनी रहते हुए भी उसे कंपनी का शेयर भी गिर जाता हैं इसी को बोलते हैं बाजार की भावनाएं
4.समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है
आईए हम समझते है समझना मुश्किल कैसे होता है उन लोगों के लिए समझाना मुश्किल होता है जो एकदम शेयर मार्केट के बारे में Beginner है एकदम नया खिलाड़ी है अगर आप थोड़ा-थोड़ा ध्यान देंगे तो आप भी सीख जाएंगे इसमें क्या बैलेंस शीट देखना है कैश फॉलो स्टेटमेंट देखना है असेट्स कितना कंपनी में डेट कितना पड़ा है बस यही सब देखना है हां लेकिन आपको लगेगा यह सब कैसे देखेंगे कैसे नहीं अगर बहुत ज्यादा दिक्कत होगा तो आप यूट्यूब वीडियो में देख लीजिए कोई भी कंपनी का वेबसाइट में हम कैसे जाकर देखें आराम से सीख सकते हैं
Technical एनालिसिस के लाभ

टेक्निकल एनालिसिस के लाभ के बारे में पूरा अच्छा से बात करेंगे स्टेप बाय स्टेप पूरा आराम से पढ़ते रहिए बहुत मजा आएगा
1.जल्दी फैसला लेने में मदद
जब भी हम टेक्निकल एनालिसिस करते हैं या किसी स्टॉक में तो हमें उसमें चार्ट, इंडिकेटर,पैटर्न को हमें जल्दी फॉलो करके और जल्दी डिसीजन लेने में मदद करता है
2.कम समय में ट्रेडिंग की मदद
जब भी हम टेक्निकल एनालिसिस करते हैं या किसी स्टॉक में तो हमें उसमें चार्ट, इंडिकेटर,पैटर्न को हमें जल्दी फॉलो करके और जल्दी डिसीजन लेने में मदद करता है
3.भावनाओं से बचाव
जब भी हम ट्रेडिंग करते हैं तो हमेशा इमोशन भावनाएं आ जाते हैं लेकिन हम जब चार्ट्स आप पैटर्न को फॉलो करते हैं तो हमें भावनाओं के काफी काबू हो जाता है इसलिए हमें भावनाओं से भी बचाता है
4.रिस्क मैनेजमेंट
रिस्क मैनेजमेंट नाम की भी कोई चीज होती है जब भी हम टेक्निकल एनालिसिस करते हैं या चार्ट्स या पैटर्न लगाते हैं उसके बाद हमें रिस्क मैनेजमेंट करना बहुत जरूरी होता है जिस हम stop loss कहते हैं और उसी में हमारे रिस्क मैनेजमेंट होता है अगर हम रिस्क मैनेजमेंट नहीं करेंगे तो मैं काफी ज्यादा भी लॉस हो सकता है टेक्निकल एनालिसिस है लेकिन फिर भी मैं रिस्क मैनेजमेंट का बहुत इंपॉर्टेंट रहता है ।
टेक्निकल एनालिसिस की सीमाएं
टेक्निकल एनालिसिस की कुछ सीमाएं है जो शेयर मार्केट में हम buy और sell का जल्दी-जल्दी निर्णय लेते हैं लेकिन हम जितनी जल्दी buy और sell करते हैं उसके कुछ नुकसान और कुछ सीमाएं भी हैं जो हम नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं इसलिए हम उनके कुछ मुख्य कमियों के बारे में हम सीखेंगे।
1.केवल चार्ट पर भरोसा
टेक्निकल एनालिसिस में हमेशा चार्ट पर भरोसा रहता है जैसे कि वॉल्यूम इंडिकेटर प्राइस एक्शन यह सब देखा जाता है लेकिन जैसे फंडामेंटल प्रॉफिट, कर्ज, ग्रोथ असेट्स यह सब हम नहीं देख सकते हैं
2.गलत संकेत मिल सकते हैं
टेक्निकल एनालिसिस में आजकल देखेंगे कभी गलत संकेत भी मिल जाते हैं जब हम ट्रेड लेते हैं किसी सपोर्ट या रेजिस्टेंस में उसमें सही संकेत देता है जब हम ट्रेड लेते हैं तो उसके बाद भी डायरेक्शन कुछ चेंज हो जाता है इसलिए हमें कभी भी इंडिकेटर या सपोर्ट या रेजिस्टेंस प्राइस एक्शन कभी भी पूरा मिक्स नहीं करना चाहिए लेकिन कुछ भी बोलो यार शेयर मार्केट में हंड्रेड परसेंट की मुनाफा इसमें हो कोई गारंटी नहीं है
3. बड़ी खबरों का असर नहीं दिखता
बड़े खबरों का असर जब भी हम देखते हैं कि कोई भी शेयर मार्केट में ट्रेड करते हैं तो हमेशा कुछ ना कुछ पैटर्न बनता है जैसे की W पैटर्न M पैटर्न यह सब बनने के बाद भी डायरेक्शन चेंज हो जाता है कैसे होता है डायरेक्शन इसलिए चेंज हो जाता है क्योंकि कोई भी मार्केट में न्यूज़ या इवेंट न्यूज़ आता है इसी वजह से मार्केट में असर पड़ता है।
4.हर किसी के लिए नहीं
हर किसी के लिए टेक्निकल एनालिसिस नहीं होता है जिसे हर किसी के लिए इन्वेस्टिंग नहीं होता है वैसे ही हर किसी के लिए ट्रेडिंग भी नहीं होता है इसमें काफी कुछ सीखने के लिए ध्यान देना पड़ता है सीखने के लिए तो दोनों चीज ध्यान देना पड़ता है फंडामेंटल एनालिसिस भी टेक्निकल एनालिसिस लेकिन सबके लिए हर कुछ नहीं बना है इसलिए जैसा जिसका सुविधा पड़ता है इसलिए आप इन्वेस्टिंग करते रहिए जैसे थोड़ा बहुत भी आपको टाइम मिले तो आप ट्रेंडिंग पर ध्यान दे सकते हैं
5.ओवरएनालिसिस का खतरा
ओवरएनालिसिस के खतरा इसलिए रहता है जब भी हम ट्रेडिंग करते हैं तो उसमें हम बहुत सारे इंडिकेटर या प्राइस एक्शन वॉल्यूम इंडिकेटर बहुत सारा चीज लगा देंगे तब हम कंफ्यूज हो जाएंगे इसलिए ओवरएनालिसिस करना बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ जाता है इसलिए जब भी ट्रेडिंग करें तो काम इंडिकेटर use करे। या ज्यादा इंडिकेटर या पैटर्न को मिक्स ना करें । ओवर एनालिसिस का खतरा रहेगा।
निष्कर्ष
फंडामेंटल एनालिसिस का टेक्निकल एनालिसिस यह दोनों अपने-अपने जगह पर अच्छे हैं
फंडामेंटल एनालिसिस उन लोगों के लिए है जो लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं
टेक्निकल एनालिसिस उन लोगों के लिए है जो शॉर्ट टर्म में पैसा कमाना चाहते हैं की तुरंत बाय और तुरंत सेल करके ट्रेडिंग करते हैं
फंडामेंटल एनालिसिस टेक्निकल एनालिसिस दोनों अपने जगह-जगह अच्छे हैं लेकिन हमेशा किसी पर डिपेंड नहीं होना चाहिए इसलिए हमें एक फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस दोनों मिक्स करके सीखना चाहिए क्योंकि अगर हम दोनों अगर थोड़ा-थोड़ा सीखेंगे तो हमें मार्केट की काफी ज्यादा समझ होगी और कम से कम हम लॉस भी कर सकते हैं
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